यूआरएल क्या है समझाइए | URL Link in HIndi (Computer Notes)

एक इंटरनेट user के लिए ये जानना जरुरी होता हैं की URL क्या होता हैं और ये कैसे काम करता हैं आज हम यूआरएल् के बारे में ही जानने वाले हैं।

सबसे पहले आता हैं WWW अगर आप किसी भी website को open करते हो या किसी link पर click करते हो तो जैसे ही वेबसाइट open होती हैं तो उसके URL पर ध्यान देना ऊपर की side पर www लिखा होगा। इसका full form होता हैं world wide web ये एक information system होता हैं जहा पर बहुत सारे photos ,video or document इन सबका link हैं जो basically save रहता हैं इसे हम URL कहते हैं ।

 

1). यूआरएल क्या होता है? ( What is URL Definition)

जिस तरह किताब में किसी खास page को ढूढ़ने के लिए हम page number का प्रयोग करते हैा ठीक उसी तरह हम किसी website में किसी खास page तक पुहंचने के लिए यूआरएल (URL) का प्रयोग करते हैा आज हम यूआरएल(URL) के बारे में जानेगे जो आप वेबसाइट के आखिर में लिखा देखते हो .com ,.org ,.in जैसे https://www.abc.com.

(i). यूआरएल का फुल फॉर्म क्या है? (URL full form)-

यू आर एक का पूरा नाम यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर (Uniform Resources Locator ) होता है।




(ii). यूआरएल की हिस्ट्री (History of URL)-

आप किसी भी वेब साईट का लीन्क ब्राउजर में type करते हो तो उसे हम URL कहते है। ये हर वेबसाइट के starting में होता हैा जैसे HTTP या HTTPS.

HTTP का full form होता है (Hyper Text Transfer Protocol)
HTTPS का full form होता है (Hyper Text Transfer Protocol Secure)

Uniform Resource Locators (URL )को वर्ल्ड वाइड वेब बनाने वाले Tim Berners -Lee और उनकी टीम दवरा इसे दुनिया के सामने लाया गया था। टीम बेर्नेर्स ली की ये वर्ल्ड वाइड वेब के बाद दूसरी खोज थी इन्होने ही बताया था की यूआरएल किसी भी वेब पेज को एक unique location प्रदान
करता हैं , जिसे आसानी से खोजा जा सकता हैं HTML को खोजने के बाद standard language का इस्तेमाल करके वर्ल्ड वाइड वेब के साथ बहुत सारे pages को आपस में जोड़ दिया गया और इस तरह यूआरएल का निर्माण किया गया जिससे इंटरनेट का use दिन पर दिन बढ़ता जा रहा हैं.

 

2) URL के पार्ट्स  (Main Parts of URL)

यूआरएल के तीन हिस्से होते हैं-

  1.  प्रोटोकॉल(Protocol)
  2. होस्ट नाम (Host Name )
  3. फाइल नाम या रिसोर्स लोकेशन( File Name or Location )

प्रोटोकॉल ,होस्ट नाम तथा फाइल नाम आपस में मिलकर एक URL का निर्माण करते हैा

url basic structure consisting of protocol, domain path and webpage
image- businessinsider

a. PROTOCOL-

जब आप अपने स्मार्टफोन, लपटोंप या डेस्कटॉप में किसी web browser के search box में कुछ भी सर्च करते हो तो वहा आपको HTTP या HTTPS लिखा होता है जिसे प्रोटोकॉल कहते है

b. HOST NAME-

Host names किसी भी website का URL होता हैं जिसे हम ब्राउज़र में सर्च करते हैं जैसे
( Google .com ) ये होस्ट नेम्स Internet database से आते हैं जैसे DNS इसे हम IP Address कहते हैं जैसे
www.question.com.

c. FILE NAMES & RESOURCE LOCATION-

File Names किसी भी फाइल की डायरेक्टरी को दर्शाता हैं जो host के अंदर मौजूद होता हैं उसे हम File names या Resource Location कहते हैं
https://www.google.com/search



3). यू आर एल् संरचना (URL Basic Structure)-

Domain File Path

https://www.example.com/image/apple.jpg

Protocol Directory

 

4). URL कैसे काम करता हैं? (How does URL work)

यूआरएल को कुछ इस तरह डिज़ाइन किया गया कि हम सब को याद रखने में आसानी हो और वो हम याद रख सके किसी भी computer या सिस्टम को website को आसानी पहचानने के लिए information कि जरूरत होती हैं इसके लिए browser को किसी भी website को पहचानने के लिए IP Adders का इस्तेमाल करना होता हैं IP Adders को इंटरनेट प्रोटोकॉल भी कहते हैं जो इस प्रकार का होता हैं

IP Adderss – 197 .365 .35 .2

हम जब भी किसी वेबसाइट का यूआरएल type करते हैं तब हमारा browser – DNS जिसे Domain Name server कहा जाता हैं वो यूआरएल को unique IP में change कर देता हैं और इस तरह से browser वेबसाइट तक पहुंच जाता हैं

 

 

READ- वेबसाइट क्या होता है? | What is Google Website in Hindi

 

5). यूआरएल से जुड़े शब्द (URL  Terminology)

a. HTTP://

का full form होता है (Hyper Text Transfer Protocol)
यह एक तरह का Web Protocol होता हैा
HTTP नियमों और मानकों का सेट प्रदान करता है जो यह नियंत्रित करता है कि वर्ल्ड वाइड वेब पर किसी भी जानकारी को कैसे प्रसारित किया जा सकता है। HTTP वेब ब्राउज़र के लिए मानक नियम प्रदान करता है।

HTTP एक एप्लीकेशन लेयर नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो TCP के ऊपर बनाया गया है। HTTP हाइपरटेक्स्ट संरचित टेक्स्ट का उपयोग करता है जो टेक्स्ट वाले नोड्स के बीच तार्किक लिंक स्थापित करता है। इसे “स्टेटलेस प्रोटोकॉल” के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि प्रत्येक कमांड को पिछले रन कमांड के संदर्भ के बिना अलग से निष्पादित किया जाता है। HTTPS क्या है? HTTPS का अर्थ हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल सिक्योर है। यह HTTP का अत्यधिक उन्नत और सुरक्षित संस्करण है। यह पोर्ट नंबर का उपयोग करता है। डेटा संचार के लिए 443। यह एसएसएल के साथ संपूर्ण संचार को एन्क्रिप्ट करके सुरक्षित लेनदेन की अनुमति देता है। यह एसएसएल/टीएलएस प्रोटोकॉल और एचटीटीपी का संयोजन है। यह एक नेटवर्क सर्वर की एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित पहचान प्रदान करता है। HTTP आपको सर्वर और ब्राउज़र के बीच एक सुरक्षित एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाने की भी अनुमति देता है। यह डेटा की द्वि-दिशात्मक सुरक्षा प्रदान करता है। यह संभावित रूप से संवेदनशील जानकारी को चोरी होने से बचाने में आपकी मदद करता है।

 

b. HTTPS://

का full form होता है (Hyper Text Transfer Protocol Secure)
यह HTTP का अत्यधिक उन्नत और सुरक्षित संस्करण है। यह पोर्ट नंबर का उपयोग करता है। डेटा संचार के लिए 443। यह SSL के साथ संपूर्ण संचार को एन्क्रिप्ट करके सुरक्षित लेनदेन की अनुमति देता है। यह एसएसएल/टीएलएस प्रोटोकॉल और एचटीटीपी का संयोजन है। यह एक नेटवर्क सर्वर की एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित पहचान प्रदान करता है। HTTP आपको सर्वर और ब्राउज़र के बीच एक सुरक्षित एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाने की भी अनुमति देता है। यह डेटा की द्वि-दिशात्मक सुरक्षा प्रदान करता है। यह संभावित रूप से संवेदनशील जानकारी को चोरी होने से बचाने में आपकी मदद करता है।




c. www(SUB DOMAIN)-

वर्ल्ड वाइड वेब क्या है?

वर्ल्ड वाइड वेब, जिसे वेब के रूप में भी जाना जाता है, वेब सर्वर में संग्रहीत वेबसाइटों या वेब पेजों का एक संग्रह है और इंटरनेट के माध्यम से स्थानीय कंप्यूटरों से जुड़ा है। इन वेबसाइटों में टेक्स्ट पेज, डिजिटल इमेज, ऑडियो, वीडियो आदि होते हैं। उपयोगकर्ता कंप्यूटर, लैपटॉप, सेल फोन आदि जैसे अपने उपकरणों का उपयोग करके इंटरनेट पर दुनिया के किसी भी हिस्से से इन साइटों की सामग्री तक पहुंच सकते हैं। WWW, साथ में इंटरनेट के साथ, आपके डिवाइस पर टेक्स्ट और मीडिया की पुनर्प्राप्ति और प्रदर्शन को सक्षम बनाता है।

 

d. Domain Name-

किसी इंटरनेट पते या नाम का जिक्र करते समय, एक डोमेन या डोमेन नाम एक वेबसाइट का स्थान होता है। उदाहरण के लिए, डोमेन नाम “google.com” आईपी एड्रेस “216.58.216.16” की ओर इशारा करता है। आम तौर पर, संख्याओं की लंबी स्ट्रिंग के बजाय नाम याद रखना आसान होता है। एक डोमेन नाम में अधिकतम साठ तीन वर्ण होते हैं, न्यूनतम एक वर्ण के साथ, और URL में प्रोटोकॉल के बाद दर्ज किया जाता है, जैसा कि निम्नलिखित उदाहरण में दिखाया गया है।

 

e. Directory-

एक directory आपके कंप्यूटर पर फ़ाइलों को संग्रहीत करने के लिए एक स्थान है। निर्देशिकाएँ एक पदानुक्रमित फ़ाइल सिस्टम में पाई जाती हैं, जैसे कि Linux, MS-DOS, OS/2, और Unix। चित्र विंडोज/डॉस ट्री कमांड से आउटपुट का एक उदाहरण है। यह सभी स्थानीय और उपनिर्देशिकाओं को दिखाता है (उदाहरण के लिए, “सीडीएन” निर्देशिका में “बड़ी” निर्देशिका)। इस अवलोकन को देखते समय, वर्तमान निर्देशिका C: ड्राइव की मूल निर्देशिका है। इसे “रूट” निर्देशिका कहा जाता है क्योंकि इसके नीचे कुछ भी नहीं है, और अन्य निर्देशिकाएं “शाखा” हैं। यदि आप एक से अधिक उपयोगकर्ता खातों के साथ एक ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं, तो निर्देशिका को होम निर्देशिका के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है

 

 

 

 

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