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3 साल के ब्लॉगिंग प्रो-टिप्स | BLOGGING TIPS IN HINDI

3 साल पहले जब मैंने अपना सबसे पहला ब्लॉग बनाया था तो उस वक्त मुझे पता नहीं था कि ब्लॉगिंग को as a career भी अपनाया जा सकता है।


उस समय मुझे ब्लॉगिंग करने का काफी शौक था और इसके जरिए अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाना मुझे बहुत अच्छा लगता था। मुझे काफी खुशी होती थी जब सर्च करने पर गूगल में मेरा ब्लॉग मुझे दिखता था और अपना नाम लिखने पर अपनी फोटो!

in the front of computer a guy is holding phone in hands

धीरे-धीरे मुझे ब्लॉगिंग करने और इसके बारे में जानने में और ज्यादा मजा आने लगा। उस वक्त मैं स्कूल में था और मैं अपनी पढ़ाई से ज्यादा समय अक्सर ब्लॉगिंग को दिया करता था। हालांकि मुझे उस वक्त ब्लॉगिंग ज्यादा समझ तो नहीं आती थी मगर फिर भी इसके बारे में पढ़ने में काफी मज़ा आता था।


फिर एक दिन मुझे पता चला कि ब्लॉगिंग से पैसा भी कमाया जा सकता है तो मुझे काफी हैरानी हुई। इसके बाद मैंने ब्लॉगिंग से जुड़ी बहुत सारी बातें सीखीं और उन्हें अपने ब्लॉग पर टेस्ट किया; जिनमें SEO, Digital Marketing और User Experience (UX) प्रमुख हैं।


आज मैं ब्लॉगिंग को part time ही सही लेकिन professionally करता हूँ और अगर आप इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो इस बात के काफी ज्यादा chances हैं कि आप भी ब्लॉगिंग करते हों या फिर करने की सोच रहे होंगे। 


ब्लॉगिंग के दौरान (खासकर शुरुआत में) मैंने बहुत सारी गलतियाँ की है जिनसे मुझे बहुत सारी चीजों सीखने को मिली हैं। आज के इस आर्टिकल में मैं ब्लॉगिंग से जुड़े कुछ अपने कुछ पर्सनल इक्स्पीरीअन्सेज आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ, ताकि आपको ब्लॉगिंग करने के लिए मोटिवेशन मिले और आप वो गलतियाँ न करो जो मैंने अपनी ब्लॉगिंग जर्नी के शुरुआत में करे थी। पेश हैं मेरे कुछ ब्लॉगिंग अनुभव-



एक ब्लॉगर के ब्लॉगिंग टिप्स | BLOGGING TIPS OF A BLOGGER IN HINDI



1). एसईओ के जुड़े अनुभवी टिप्स (Experience Based SEO Tips):

ये कुछ SEO से जुड़ी बातें हैं जो मैंने अब तक के अपने ब्लॉगिंग सफर में सीखीं हैं-


(i)- एसईओ बस कीवर्ड्स, कंटेन्ट और बैकलिंक्स तक ही सीमित नहीं है (SEO Is Beyond Keywords, Content & Backlinks):

अक्सर बहुत सारे लोग मेरसे पूछते हैं- "सर, मेरे ब्लॉग का कंटेन्ट अच्छा है; कीवर्डस का भी सही use किया है और कुछ लिंक्स भी बना लिए हैं लेकिन फिर भी मेरे ब्लॉग पर ट्रैफिक नहीं आ रहा है। क्या कारण हो सकता है?"


अगर आपके साथ भी यही स्थिति है तो मैं आपको बताना चाहूँगा एक चीज के बारे में जो आप miss कर रहे हैं और वो चीज है- यूजर इक्स्पीरीअन्स (User Experience/UX).


जिन लोगों का UX शब्द से पहली बार सामना हुआ है उन्हें बता दें कि इसका मतलब होता है- "आपके ब्लॉग पर जो लोग आ रहे हैं उन्हें आपका ब्लॉग कैसा लग रहा है।" दूसरे शब्दों में कहें तो आपकी साइट पर आने वाले लोगों (यानि Users) का आपकी साइट के साथ ओवरॉल इक्स्पीरीअन्स।


अगर आपकी वेबसाइट क्लिक होने के बाद बहुत जल्दी खुलती है; लोग आपके ब्लॉग को बहुत ज्यादा देर तक पढ़ रहे हैं; बहुत सारी पोस्टें पढ़ रहें हैं; कमेन्ट कर रहे हैं; आपकी पोस्ट शेयर कर रहे हैं तो आप मान सकते हैं कि आपकी साइट का UX शानदार है। और अगर ऐसा नहीं है तो आपको इसमें सुधार करने की जरूरत है।


अगर आपका कंटेन्ट शानदार है तो आप अपनी साइट का UX बहुत ही आसानी से सुधार सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप नीचे दिया गया आर्टिकल पढ़ सकते हैं-



* READ- UX- SEO क्या है और कैसे करें? जानिए सबकुछ



एक बार अगर आपकी साइट में Content+ Keywords+ Backlinks+ UX का बैलेन्स्ड मिश्रण हो जाता है तो आपके ब्लॉग को आगे बढ़ने से खुद गूगल भी नहीं रोक सकता... :p 



(ii)- कीवर्ड्स तभी काम करते हैं जब आपका कंटेन्ट शानदार होता है (Keywords Are Only Effective As Long As Your Content Is)-

ब्लॉग में सिर्फ अच्छे कीवर्डस का इस्तेमाल करके आप उसे गूगल में ऊपर रैंक नहीं करवा सकते। क्योंकि अगर ऐसा होता तो दुनिया की लगभग हर साइट पॉपुलर होती क्योंकि करीब-करीब हर साइट कीवर्डस का तो प्रयोग करती ही है।


कीवर्डस तभी अपना काम अच्छी तरह करते हैं जब तक आपका कंटेन्ट शानदार है। और हाँ एक बार और, अगर आपका कंटेन्ट शानदार है तो आपको बहुत ज्यादा कीवर्डस इस्तेमाल करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी (उदाहरण के लिए आप इसी साइट को देख सकते हैं).


टाइटल, हेडिंग, सबहेडिंग्स और माइनर हेडिंग्स के अलावा पोस्ट की शुरुआत और अंत के कुछ सेन्टन्सेस में कीवर्डस शामिल करना पर्याप्त है। अगर आपका कंटेन्ट शानदार नहीं है तो आपको बार-बार अपने कंटेन्ट में keywords रीपीट करने या उन्हें बोल्ड, इटैलिक करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि गूगल पिछले 20 सालों में इतना समझदार तो हो ही चुका है कि वह समझ पाए कि आपके कंटेन्ट को किस कीवर्ड के लिए और कितने नंबर पे रैंक करना है।


एक छोटा-सा रूल है, जो आप अपने ब्लॉग पर ट्राइ कर सकते हैं- 


कीवर्ड रिसर्च को अपना 10% वक्त दीजिये; कंटेन्ट रिसर्च और राइटिंग को 50%; वहीं Off-Page SEO और Promotions को बाकी का 40% वक्त दीजिए।



इस रूल पे गौर कीजिए और इसे अच्छे से फॉलो कीजिए, नतीजा आप खुद देखेंगे।


(iii)- गूगल सैंडबॉक्स और गूगल हनीमून पीरीअड के बारे में जानिए (Google Sandbox and Google Honeymoon Period):

गूगल सैंडबॉक्स (Google Sandbox)- बहुत सारे SEO Experts ने अपनी रिसर्च के जरिए पता लगाया है कि गूगल नई वेबसाइटों पर जल्दी-से भरोसा नहीं करता है। इसके लिए वह नई वेबसाइटों पर करीब पहले 6 महीनों तक कड़ी नजर रखता है और यह पता लगाने की कोशिश करता है कि क्या कोई वेबसाइट quality website है या नहीं।


सैंडबॉक्स पीरीअड के दौरान गूगल नई वेबसाइटों को अपने सर्च में बहुत ऊपर रैंक नहीं करता है चाहें उनका कंटेन्ट और SEO कितना भी अच्छा क्यों न हो।


एक बार जब गूगल को साइट पे भरोसा हो जाता है तो वह उसे धीरे-धीरे अपने सर्च में ऊपर जगह देने लगता है और इस तरह वेबसाइट Google Sandbox से बाहर आ जाती है।


तो इसलिए अगर आपकी वेबसाइट नई है और गूगल में रैंक नहीं कर रही है तो निराश न हो और मेहनत करते रहें; कुछ ही महीनों में आपको नतीजा दिख जाएगा।


गूगल हनीमून पीरीअड (Google Honeymoon Period)- एक बार जब गूगल को आपकी वेबसाइट पे भरोसा हो जाता है तो आपको खुद महसूस होगा कि आपकी साइट बहुत तेजी से गूगल में रैंक हो रही है और आपकी साइट का ट्रैफिक बढ़ रहा है।


(iv) बैकलिंक्स के बारे में (About Backlinks):

बहुत सारे नए लोगों को लगता है कि अगर उनके ब्लॉग के backlinks नहीं है तो गूगल उन्हें अपने सर्च में कभी नहीं दिखाएगा। जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।


गूगल में ब्लॉग के रैंक होने के लिए बैकलिंक्स का योगदान 23% होता है जबकि बाकी का 77% सीधे-सीधे आपके हाथ में होता है। इसलिए मेरे हिसाब से शुरुआत के 4-6 महीने में आपको अपने ब्लॉग के कंटेन्ट और प्रमोशन पर ध्यान लगाना चाहिए, जिससे कि आपकी रैंकिंग्स पर करीब 77% फरक पड़ता है।


23 प्रतिशत के चक्कर में 77% से हाथ ना धो बैठे। और रही backlinks की बात तो गूगल में रैंक करने के लिए ये जरूरी नहीं है जबतक कि आपकी competitor sites के पास भी ढेर सारे backlinks मौजूद नहीं है।


मैंने खुद ये इक्स्पीरीअन्स किया है कि एक बार अगर आप गूगल में रैंक करने लग जाते हैं और अगर आपका कंटेन्ट शानदार है तो आपको backlinks अपने आप मिलने लग जाते हैं और आपको लोगों से backlinks मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। 





(v)- ओवर-एसईओ ना करें (Never Overdo SEO):

ओवर SEO यानि हद से ज्यादा SEO करना। जैसे- बहुत ज्यादा कीवर्डस का इस्तेमाल करना, बहुत ज्यादा backlinks बनाना। 


मैंने personally नोटिस करा है कि कई ब्लॉगर बहुत ज्यादा SEO करते हैं। यहाँ तक कि कई सारे experienced bloggers भी।


मेरा खुद का अनुभव है कि ओवर SEO करने से कुछ ज्यादा फायदा नहीं होता है खासकर keywords का। जब आप शुरुआत में हों तो Over SEO से ज्यादा ध्यान अपने कंटेन्ट और राइटिंग स्किल्स को शानदार बनाने में करें। ये ज्यादा बेहतर होगा। 


एक बार जब आपकी साइट बड़ी हो जाती है तो आपको Over SEO करने का भी फायदा होता है लेकिन शुरुआत में Over SEO करने से फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है क्योंकि इस वक्त गूगल को आपपर भरोसा नहीं होता।


कुछ और SEO टिप्स-

* पैसे देकर लिंक्स ना बनाएँ। लिंक्स की क्वालिटी ज्यादा मैटर करती है क्वानटिटी नहीं।

* कीवर्ड्स SEO से ज्यादा फोकस UX पे करें।

* लंबे और Indepth आर्टिकल लिखें। इससे आप naturally अपने आर्टिकल में ज्यादा keywords जोड़ते जाते हैं जिससे आपकी साइट का SEO सुधरता है। 

* अपनी पोस्ट में LSI Keywords को naturally ऐड करें। 


2). कंटेन्ट के अनुभवी टिप्स (Experienced Based Content Tips):

ये ब्लॉग के कंटेन्ट से जुड़े कुछ टिप्स हैं जो मेरे व्यक्तिगत ब्लॉगिंग अनुभव पर आधारित हैं।


(i)- अपने कंटेन्ट को मजेदार बनाइये (Make Your Content Interesting):

गूगल, यूट्यूब समेत बहुत सारे अन्य सर्च इंजन आजकल इस बात पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं कि लोग आपके कंटेन्ट के साथ कितनी देर तक engage हो रहे हैं।


मसलन, अगर ज्यादातर लोग आपकी पोस्ट को आखिर तक पढ़ या फिर देख रहे हैं तो इसका मतलब आपका कंटेन्ट अच्छा है वहीं अगर ज्यादातर लोग आपके कंटेन्ट के साथ पूरी तरह engage नहीं हो रहे हैं इसका मतलब है कि आपका कंटेन्ट ज्यादा खास नहीं है। इसलिए कोशिश करें कि आपका कंटेन्ट मजेदार हो जिससे लोग आपके कंटेन्ट के साथ अंत तक जुड़े रहें।






अपने कंटेन्ट को मजेदार बनाने के लिए आप उसमें कोई कहानी जोड़ सकते हैं; अपनी ज़िंदगी का कोई किस्सा जोड़ सकते हैं जिससे लोगों को motivation मिले या फिर आप कोई interesting fact भी ऐड कर सकते हैं।


(ii) वर्ड काउन्ट पर बहुत ज्यादा ध्यान न दें (Avoid Being Extremely Concerned Regarding Word Count):

मैंने बहुत सारे लोगों को देखा है जो आर्टिकल के word count यानि आर्टिकल कितने शब्दों का होना चाहिए, इसपे बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं।


मैं मानता हूँ कि word count मायने रखता है लेकिन उतना भी नहीं जितना बहुत सारे लोग सोचते हैं।


गूगल के अनुसार आपका कंटेन्ट जितना ज्यादा in-depth होता है in gereral वह उसे अपने सर्च में उतनी ही ज्यादा प्राथमिकता देता है। 


ध्यान देने वाली बात यह है कि यहाँ पर "in-depth" शब्द का प्रयोग किया गया है जिसका मतलब "विस्तार" से है। यानि आप जिस टॉपिक पर लिख रहे हैं आपके कंटेन्ट में उसके बारे में ज्यादातर चीजें covered होनी चाहिए।


एक ही बात को बार-बार रीपीट करने से कंटेन्ट "indepth" नहीं बंटा है बल्कि टॉपिक के अलग-अलग पहलू के बारे में सही जानकारी देने से कंटेन्ट में "indepthness" आती है।


इसलिए कंटेन्ट लिखने से पहले कभी भी already ये डिसाइड न करें कि मुझे यह पोस्ट कैसे भी करके "इतने (X)" वर्डस में खत्म करनी है। हमेशा फ़्लो में लिखते रहे और लिखते रहें।


(iii) कंटेन्ट लिखने से पहले रिसर्च करें (Do Content Research):

इससे पहले कि आप कंटेन्ट लिखना शुरू करें, यह निश्चित करें कि आपको उस टॉपिक को लेकर पूरी जानकारी हो जिसके बारे में आप लिखने जा रहे हैं।


अगर आपको लगता है कि आपको उस टॉपिक के बारे में already अच्छा खासा knowledge है तो कंटेन्ट रिसर्च करने की कोई खास जरूरत नहीं है वहीं अगर आपको लगता है कि आपके पास उस टॉपिक के बारे में कंटेन्ट लिखने के लिए पर्याप्त जानकारी मौजूद नहीं है तो आपको कंटेन्ट रिसर्च जरूर करनी चाहिए।


कंटेन्ट रिसर्च करने के लिए आप Quora, Reddit, Youtube, Google और उस टॉपिक से रिलेटेड अन्य साइट्स पर जा सकते हैं और वहाँ पर अपने टॉपिक के बारे में गहन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


कंटेन्ट रिसर्च करने से आपके कंटेन्ट में एक comprehensiveness आती है जिससे लोगों को पूरी जानकारी मिल पाती है और वे लंबे समय तक आपके ब्लॉग से जुड़े रहते हैं।


कंटेन्ट रिसर्च के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप ये आर्टिकल पढ़ सकते हैं-



*READ- कंटेन्ट राइटिंग क्या है इससे पैसे कैसे कमाएँ?



(iv) क्वानटिटी या क्वालिटी? (Quantity vs Quality):

मैंने बहुत सारे लोगों को कहते हुए सुना है कि अगर अपने ब्लॉग को सफल बनाना है तो दिन में कम से कम 1 पोस्ट लिखना जरूरी है।


ये बात सरासर गलत है। मैंने पिछले 2 साल में अपने ब्लॉग पर सिर्फ 80 पोस्ट लिखी हैं और इन पोस्टों की बदौलत मेरे ब्लॉग पर वर्तमान में 20,000 pageviews का ट्रैफिक हर महीने आता है। इसलिए मुझे तो नहीं लगता है कि पोस्टों की संख्या इंटरनेट के आज के इस दौर में बहुत ज्यादा मायने रखती है।


आज इंटरनेट पर 1 अरब ब्लॉग्स हैं। अगर हिसाब लगाएँ तो हर 7 व्यक्तियों पर एक ब्लॉग!! यह तथ्य काफी हैरान करता है।


इसका मतलब है, कि इंटरनेट पर कंटेन्ट की कोई कमी नहीं है। कमी है तो सिर्फ और सिर्फ quality कंटेन्ट की। इसलिए चाहें आप हफ्ते में 2 ही पोस्ट करें लेकिन उन्हें पूरी keyword research, content research और interesting ढंग से लिखें। ताकि पढ़ने वाला उनसे पूरी तरह चिपका रहे। 


(v) नई पोस्टें लिखने से बेहतर है पुराने को अपडेट करना (Updating Existing Content Is Better Than Writing New Content):

हम ये जान चुके हैं कि आज कंटेन्ट की quantity बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती है यानि आप कितना कंटेन्ट produce करते हैं ये मायने नहीं रखता है। जो चीज मायने रखती है वो है आप कितना अच्छा कंटेन्ट produce करते हैं यानि आपके कंटेन्ट की quality.


अगर आपने 2 साल पहले कोई पोस्ट लिखी है तो इसके काफी chances हैं कि उसमें बहुत सारी चीजें या फैक्ट्स पुराने हो गए हों। उस वक्त आपके कंटेन्ट की quality चाहे कितनी भी अच्छी हो लेकिन आज वह पुराना हो गया है जिसकी वजह से उसकी quality अपने आप गिर गई है।


अपने पुराने कंटेन्ट की quality को सुधारने का एक अच्छा तरीका है- "पुराने कंटेन्ट को edit करना और उसमें जरूरी बदलाव करके उसे दोबारा publish करना।" 


यह प्रक्रिया आप अपने कंटेन्ट के साथ हर 6 महीने के अंतराल में दोहरा सकते हैं। इससे आपका existing content fresh भी रहेगा और गूगल में लगातार रैंक भी करता रहेगा।


3. ब्लॉग से जुड़े टेक्निकल टिप्स (Experienced Based Blog Technical Tips):

ब्लॉग का टेक्निकल पहलू भी बहुत ज्यादा मायने रखता है खासकर अगर आप wordpress.org जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये कुछ टेक्निकल बातें हैं जो आपको अपने ब्लॉग के बारे में ध्यान में रखनी चाहिए-


(i) आपका ब्लॉग जल्दी लोड हो (Fast Loading Speed):

बहुत सारे SEOs मानते हैं कि आपका ब्लॉग जितनी जल्दी लोड होता है यानि खुलता है उतना ही ऊपर गूगल उसे रैंक करता है।


इसलिए अपने ब्लॉग पर बहुत ज्यादा ads ना लगाएँ, बहुत सारे tools का use ना करें क्योंकि ये लोड होने में ज्यादा वक्त लगाते हैं।


(ii) ब्लॉग पोस्ट के बीच-बीच में छोटे-छोटे boxes का उपयोग करें (Use Boxes):

आप अपनी ब्लॉग पोस्ट के बीच-बीच में छोटे-छोटे HTML, CSS बोक्सेस का use कर सकते हैं जिनके जरिए आप अपने ब्लॉग का प्रमोशन कर सकते हैं।


मसलन, आप अपने youtube channel को सबस्क्राइब करने को बोल सकते हैं; अपने व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करने को बोल सकते हैं या फिर फेस्बूक ग्रुप जॉइन करने को बोल सकते हैं।


(iii) थोड़ी बहुत HTML, CSS और JavaScript (JS) जरूर सीखें (Learn General Codes):

ब्लॉगिंग के लिए यह जरूरी है कि आपको थोड़ी-बहुत ही सही लेकिन HTML और CSS जैसी web languages का ज्ञान हो।


अगर आपको कोडिंग का C भी नहीं आता है तो निराश न हों। आप यूट्यूब में जाके आसानी से इतना बेसिक ज्ञान ले सकते हैं और ये langauges बहुत ज्यादा आसान है खासकर HTML जिसे हर कोई 1 हफ्ते में आसानी से सीख सकता है। 


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4. पैसा संबंधी टिप्स (Monetization Related Stuff):

बहुत सारे लोग ब्लॉग सिर्फ इसलिए बनाते हैं ताकि वे पैसे कमा सके। ऐसे लोगों के लिए कुछ experience based tips कुछ इस प्रकार हैं-

dollars on the floor

(i) शुरुआत में सिर्फ अपने ब्लॉग को बेहतर बनाने पर फोकस करें पैसे पर नहीं (Focus only on Your blog in Beginning):

बहुत सारे लोगों को ब्लॉग बनाने के तुरंत बाद पैसे कमाने की चिंता सताने लगती है ऐसे लोगों से बस मेरा यही कहना है कि आप शुरुआत में पैसे की चिंता न करें।


आप शुरुआत में बस अपने कंटेन्ट को अच्छा बनाइये और उसमें जरूरी सुधार करते रहें। इसके अलावा अपने ब्लॉग का प्रमोशन करते रहिए।


2-3 महीने बाद जब आपको लगे कि आपके ब्लॉग पर पर्याप्त ट्राफिक आने लगा है तब आप adsense के लिए अप्लाइ कीजिए। अपने ब्लॉग को बेहतर बनाइये पैसा अपने आप आने लगेगा।


(ii) अगर आपके ब्लॉग पर लोग नहीं आते हैं तो ads लगाने का कोई फायदा नहीं है

बहुत सारे लोग शुरुआत में ही adsense approval को लेकर बहुत ज्यादा सोचने लगते हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।


शुरुआत में अगर आपके ब्लॉग पर ट्रैफिक नहीं है तो adsense approval मिलने का भी कोई खास फायदा नहीं है। इसलिए बेहतर होगा कि आप adsense के लिए तभी अप्लाइ करें जब आपके ब्लॉग पर enough ट्राफिक आने लगे।


5. ब्लॉगिंग से जुड़े अन्य अनुभव (Other Blogging Experience Based Tips):


(i) अपने रीडर्स को लॉयल बनाइये और उन्हें कन्वर्ट कीजिए (Make Your Readers Loyal):

लोग आपका कंटेन्ट पढ़ते हैं और उन्हें वो अच्छा लगता है। तो अब क्या?

अब कोई तो ऐसा माध्यम होना चाहिए जिसके through वो आपकी आने वाली कंटेन्ट को भी पढ़ पाएँ।


इसके लिए आप अपने ब्लॉग में email या bell से subscribe करने का ऑप्शन दे सकते हैं। इसके अलावा लोगों को WhatsApp या facebook group जॉइन करने को भी बोल सकते हैं।


यकीन मानिए इससे आपके ब्लॉग को बहुत फायदा होगा, ये मेरा खुद का अनुभव है।


(ii) इंटरनेट से पढ़ते रहें और उसे अपने ब्लॉग पर अप्लाइ करते रहें (Learn And Implement):

इंटरनेट पर ब्लॉगिंग, SEO और मार्केटिंग से जुड़ी नई-नई जानकारियाँ पढ़ते रहें और उन्हें अपने ब्लॉग पर try करते रहें।


इससे आपको नई-नई techniques के बारे में पता चलेगा और वे कैसे काम करती हैं इसके बारे में भी पता चलेगा।


ब्लॉगिंग और SEO के बारे में जानने के लिए आप Backlinko और Neil Patel ब्लॉग्स को पढ़ सकते हैं।





(iii) दूसरे ब्लॉग्स से सीखें (Learn From Other Blogs):

यह चीज बहुत जरूरी है कि आप सफल ब्लॉगर्स से सीखें। ये पता लगाने की कोशिश करें कि जो लोग ब्लॉगिंग में सफल हैं वो क्यू और कैसे सफल हुए?


फिर अपनी learnings के हिसाब से आप उन चीजों को अपने ब्लॉग पर लागू कीजिए। मसलन, अगर कोई ब्लॉगर बहुत अच्छा लिखता है तो देखिए वो ऐसा कैसे कर पाता है? आप उसके जैसा लिखने के लिए क्या कर सकते हैं?


अगर आप ऐसा करते हैं तो यकीन मानिए आप जल्द ही अपनी blogging skills में सुधार पाएंगे।


(iv) बार-बार ब्लॉग चेक ना करें (Don't Check Stats So Often):

जब मैंने 3 साल पहले अपना पहला ब्लॉग बनाया था तो मुझे आदत थी कि मै दिन में कई बार (to be precise, 30-40) बार अपना ब्लॉग चेक करता था।


मै देखता रहता था कि मेरे ब्लॉग को कितने लोगों ने देखा; कितने लोगों ने उसपे कमेन्ट करा है और गूगल में वो कहाँ पर रैंक हो रहा है?


बाद में मुझे एहसास हुआ कि मै इन चीजों में बहुत ज्यादा वक्त बर्बाद कर रहा हूँ। इतना समय अगर मै अपने ब्लॉग को मैनेज करने में लगाऊ तो मेरा ब्लॉग काफी आगे जा सकता है।


अब मै दिन में सईरफ़ एक बार सुबह के समय अपने ब्लॉग की stats को चेक करता हूँ और बाकी समय ब्लॉग से जुड़ी चीजों को करने में लगाता हूँ।






ℹ️  AUTHORS' ANGLE: 

ये कुछ बातें थी जो अपने 3 साल के ब्लॉगिंग सफर में मैंने सीखीं। अगर आप इन बातों पे गौर करें और इन्हें अपने ब्लॉग पर अप्लाइ करें तो मै यकीन के साथ कह सकता हूँ कि आपका ब्लॉग सफल हो सकता है।


तो आपको ब्लॉगिंग टिप्स/Blogging Tips Hindi से जुड़ी ये पोस्ट कैसी लगी; हमें कमेन्ट बॉक्स के माध्यम से जरूर बताएँ। आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो उसे भी जरूर साझा करें।



तो दोस्तों यही था "ब्लॉगिंग प्रो टिप्स/Blogging Pro Tips In Hindi" पर हमारी आज की पोस्ट। यह आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें comment के माध्यम से जरूर बताएं और आपका कोई सवाल हो तो उसे भी जरूर पूछें। हमसे facebook पर जुड़ें ताकि आपको नई post की update मिलती रहे। 




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3 Comments

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    1. Bhut zyada likhte hai
      Bhut acha likhte h mgr thoda thoda likhe itni detail Zyada lgti hai boriyat hone lgti hai

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