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गूगल के टॉप 150 Ranking Factors की पूरी लिस्ट (2019)

अगर आप एक Blogger, Webmaster, Digital Marketer या SEO हैं, तो मेरा आपसे एक सवाल है। और सवाल ये है कि क्या आप भी अपने ब्लॉग या वेबसाइट को GOOGLE में अच्छी position पर रैंक करवाना चाहते हैं?


This image is all about Google's 200 top rankings factors in hindi.

अगर इस सवाल का जवाब आपकी मुंडी आगे-पीछे हो कर दे रही है तो इसका मतलब है कि आप भी अपनी वेबसाइट को गूगल में अच्छी जगह पर show कराना चाहते हैं।


लेकिन इससे पहले कि हम आगे बढ़े, अपने आप से ये सवाल कीजिये कि- क्या आप जानते हैं कि सर्च इंजन (जैसे-Google) कैसे काम करते हैं? आखिर क्यों गूगल कुछ वेबसाइटों को अपने search में हमेशा पहले page पर दिखाता है?


दरअसल हममें से कई ब्लॉगर्स (ज्यादातर नए) ऐसे होते हैं जो अपनी वेबसाइट को गूगल में rank करवाना तो चाहते हैं  मगर उन्हें यह पता नहीं होता कि आखिर गूगल काम कैसे करता है? किस आधार पर वह लाखों-करोड़ों वेबसाइटों को अपने सर्च में रैंक करता है। करोड़ों वेबसाइटों में से best results को ढूंढने के लिए गूगल उनमें कौन-कौन-सी खासियतों को जांचता है; परखता है?


और जब तक हमें SEO के इन सवालों के सटीक और प्रैक्टिकल जवाब मालूम नहीं होंगे, तब तक हम बस दूसरों की बनाई हुई, पूरी दुनिया में फैली हुई SEO Techniques को ही अपनी वेबसाइट पर इस्तेमाल करते रहेंगे, जो कि उतनी असरदार नहीं है जितनी कि खुद अपने दिमाग और Experience से ईजाद की हुई टेक्निक्स होंगी!








इसलिए इस Article में हम बात करने वाले हैं गूगल के उन Top 150 Ranking Factors की, जिनकी कसौटी पर वह दुनिया की करोड़ों वेबसाइटओं को परखता है और उन्हें उनकी quality के हिसाब से अपने सर्च में जगह देता है।


शानदार बात तो यह है कि गूगल के इन रैंकिंग फैक्टर्स को अच्छे से जान- समझ लेने के बाद आप इस काबिल हो जाते हैं कि अपनी creativity का ज़रा-सा इस्तेमाल करके अपनी खुद की नई नई SEO Techniques बना सकते हैं। पेश है, ब्रायन डीन के एक पॉपुलर आर्टिकल से प्रेरित Google के Top 150 Ranking Factors की लिस्ट-



• गूगल में वेबसाइट को रैंक करने के 150 बड़े फैक्टर्स/ Google 150 Top Ranking Factors List in Hindi (2019)




1)• वेबसाइट से जुड़े रैंकिंग फैक्टर्स (Site Related Ranking Factors):



1. DOMAIN AGE- आपकी वेबसाइट की उम्र क्या है या कहें कि आपकी Website कितनी पुरानी है? इससे भी आपकी Google Rankings पर थोड़ा बहुत फर्क पड़ता है। गूगल के वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर Matt Cutts कहते हैं कि गूगल अपने सर्च में पुरानी वेबसाइटों को बहुत ज़्यादा तो नही मगर थोड़ी-बहुत वरीयता तो जरूर देता हैं।


2. WEBSITE EXTENSIONS- आप अपनी वेबसाइट पे कौन-सा वेबसाइट एक्सटेंशन या Top Level Domain (जैसे- .com, .net, .in) लगाते हैं, इससे भी आपकी रैंकिंग पर थोड़ा बहुत फर्क पड़ता है। 


3. KEYWORDS IN DOMAIN AGE- आपकी वेबसाइट के नाम में Keyword मौजूद होने से रैंकिंग पर फर्क पड़ता है मगर बेहद कम! जैसे कि माना डिजिटल चीजों से सम्बंधित किसी वेबसाइट का नाम DigitalHub है तो इससे वेबसाइट को गूगल में Digital Keywords पे रैंक होने में आसानी होती है।








4. DOMAIN REGISTRATION- अगर आप अपनी वेब साईट का डोमेन खरीदते वक्त कई सालों के लिए भी पहले ही pay कर देते हैं तो गूगल की नजर में आपकी वेबसाइट की legetimacy बढ़ जाती है।


5. KEYWORDS IN SUBDOMAIN-  अगर आप की वेबसाइट के Subdomain (जैसे- digital.website.com) में Keyword मौजूद है तो यह आपकी गूगल रैंकिंग को अच्छे तरीके से प्रभावित कर सकता है।


6. DOMAIN HISTORY-  पहले से ही गलत काम के लिए इस्तेमाल हुए Domain को खरीदने पर आप की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है।


7. EXACT KEYWORD DOMAINS- अगर आप एक Keyword को ही अपनी Website बना लेते हैं (जैसे- OnlineMarketing.Com) और आपकी वेबसाइट की quality अच्छी नहीं है तो आप की रैंकिंग पर इसका गलत असर पड़ सकता है।


8. 'WHOIS' INFO- अगर आप की वेबसाइट की जानकारी (जैसे- email address, mobile number) इंटरनेट पर publicly मौजूद नहीं है तो इस बात के काफी Chances हैं कि गूगल उसे गलत समझ बैठे। इसलिए हमें domain खरीदते वक्त (अगर सम्भव हो तो) वेबसाइट की Information को Public रख लेना चाहिए।





9. PENALIZING ALL SITES- अगर किसी वजह से गूगल आपकी एक वेबसाइट को ban कर देता है तो इसका उसी IP Address से चलने वाली आपकी दूसरी वेबसाइटों पर भी बुरा असर पड़ सकता है।


10. CONTENT VALUE- गूगल ने साफ शब्दों में कहा है कि उसे उन साइटों को downrank करने में कोई झिझक नहीं होती है जो कि कुछ नया और शानदार कंटेंट लोगों को provide नहीं करती हैं।



• Read Rec: अपने ब्लॉग के लिए एक शानदार article कैसे लिखें? 11 टिप्स



11. CONTACT INFO- अगर आप अपनी वेबसाइट पर About Us, Contact Us जैसे पेज बनाते हैं तो गूगल पर इससे एक अच्छा impression पड़ता है।


12. TRUST RANK- आपकी वेबसाइट कितनी भरोसेमंद है यहां दिखाती है इससे आपकी गूगल रैंकिंग काफी हद तक प्रभावित होती है।।


13. PUBLISHING MORE POSTS- कई लोग मानते हैं कि ज्यादा पोस्ट लिखने से सर्च इंजिन में आपकी Rankings सुधरती है, लेकिन गूगल के John Mueller ने इस बात को सिरे से नकारा है।


14. HTML SITEMAP- सर्च कंसोल में XML Sitemap सबमिट करने के साथ ही साथ अपनी वेबसाइट में html sitemap page बनाने से भी सर्च इंजनों को आपकी साइट को crawl करने में आसानी होती है।








15. TERMS & PRIVACY PAGES-  इन पेजों को अपनी वेबसाइट पर लगाने से गूगल की नजर में आपकी website ज्यादा भरोसेमंद हो जाती है।


16. SAME META DESCRIPTION-  सभी पोस्टों में एक जैसे मेटा डिस्क्रिप्शन का इस्तेमाल करने से रैंकिंग में नुकसान होता है।


17. BREDCRUMB NAVIGATION- इस तरह का site-architecture यूज़र और गूगल दोनों के लिए ही उपयुक्त होता है।




18. YOUTUBE FACTOR- यूट्यूब गूगल की ही service है इसलिए youtube videos को गूगल अच्छी रैंकिंग्स प्रदान करता है।


19. GOOGLE ANALYTICS & SEARCH CONSOLE USE-  कुछ लोग मानते हैं कि गूगल एनालिटिक्स और सर्च कंसोल का use करने से रैंकिंग पे फर्क पड़ता है। मगर गूगल ने इस तथ्य को सिरे से खारिज किया है।


20. USER REVIEWS-  गूगल  कहता है कि किसी वेबसाइट की Online Rating से उसकी रैंकिंग पर अच्छा- खासा असर पड़ता है।





2)• ऑन-पेज फैक्टर्स (On Page Ranking Factors):



21. PANDA PENALTY- साल 2012 में गूगल के पांडा अपडेट के बाद से ही घटिया कंटेंट गूगल में दिखना कम हो गया।


22. LINKING TO BAD SITES- स्पैम और घटिया वेबसाइटों का link अपनी वेबसाइट में देने से हमारी वेबसाइट पर बुरा असर पड़ता है।


23. REDIRECTS- रेडिरेक्टस का गलत इस्तेमाल करने से आपकी साइट गूगल से de-index हो सकती है।


24. DISTRACTING ADS- परेशान करने वाले ads लगाने वाली website को गूगल और लोग दोनों ही पसन्द नहीं करते हैं।


25. FULL SCREEN ADS- मोबाइल की पूरी स्क्रीन को ढक  देने वाले विज्ञापन (Interstitial Popups) लगाने पर गूगल आपकी site को ज़्यादा वरीयता नहीं देता है।


26. OVER-SEO- अपनी website का ज़्यादा SEO (जैसे- Keyword Stuffing) करने पर गूगल आपकी website की रैंकिंग उठाने की जगह गिरा भी सकता है।




27. TRASH CONTENT- गूगल बेकार के कंटेंट को बड़ी आसानी से पहचान लेता है।


28. DOORWAY PAGES- जिन pages में redirects लगे होते हैं, गूगल उन्हें ऊपर रैंक करना ज़्यादा।पसन्द नही करता है।


29. OVER-ADS- कम कंटेंट पे ज़्यादा ads लगाने से user experience खराब होता है, जो गूगल को कतई पसन्द नही आता है।


30. HIDING AFFILIATE LINKS- लोगों को एफिलिएट लिंक्स के बारे में साफ-साफ जानकारी ना देने से आपकी साइट की रैंकिंग down हो सकती हैं।


31. AUTHOGENERATED CONTENT- अगर आप किसी Online Tool की मदद से  तैयार  किये हुए content को अपनी साइट पर पोस्ट करते हैं तो गूगल आपकी साइट को ban कर सकता है।


32. META DESC. KEYWORD STUFFING- पोस्ट के मेटा-डिस्क्रिप्शन में बहुत ज़्यादा keywords का इस्तेमाल करने पर आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।










3)• बैकलिंक्स से जुड़े फैक्टर्स (Backlink related Ranking Factors):



33. LINKING DOMAIN AGE- किसी नई वेबसाइट की तुलना में पुरानी वेबसाइट से मिला backlink ज्यादा असरदार होता है।


34. NO. OF LINKING DOMAIN- ऊपरी तौर पर, जितनी ज्यादा  अलग-अलग  साइटों से आपको backlinks मिलते हैं, उतनी ही आप की रैंकिंग्स में बढ़ोतरी होती है।


35. LINKS FROM VARIOUS IPs- अलग अलग IP Address या कहें अलग-अलग कम्प्यूटरों पर चलने वाली वेबसाइटों से अगर आपको backlinks मिल रहे हैं तो इस तरह के बैकलिंक ज्यादा शक्तिशाली होते हैं।


36. LINKS FROM SAME DOMAIN-  एक ही वेबसाइट से कई backlinks मिलना भी सही होता है।


37. BACKLINKS' ANCHOR TEXT- बैकलिंक में keyword या वेबसाइट का नाम मौजूद होना अच्छा रहता है।




38. IMAGE ALT TAG- वेबसाइट पे लगाए हुए फोटो पर ऑल्ट-टैग का इस्तेमाल करना SEO के लिहाज से फायदेमंद होता है।

» ब्लॉगर ब्लॉग में आप फ़ोटो पर click करके खुले options में से "PROPERTIES" के अंदर जाकर alt tag लिख सकते हैं।


39. LINKS FROM SPECIAL TLDs- .edu , .gov और .ac एक्सटेंशन वाली वेबसाइटों से मिलने वाले बैकलिंक्स को सामान्य बैकलिंको से ज़्यादा ताकतवर माना जाता है।


40. AUTHORITY OF LINKING PAGES-  किसी वेबसाइट के जिस page से आपको backlink मिल रहा है उसकी pagerank जितनी ज्यादा होगी, बैकलिंक उतना ही तगड़ा होगा।


41. AUTHORITY OF LINKING DOMAIN- जिस वेबसाइट से backlink मिल रहा है उसकी Domain Auth (DA) से backlink की मजबूती पर फर्क पड़ता है। ज़्यादा डी.ए= ज़्यादा ताकतवर बैकलिंक.


42. LINKS FROM COMPETITORS- गूगल  आपकी प्रतिद्वंदी वेबसाइटों के बारे में जानता है, इसलिए उनसे मिले बैकलिंको को वह ज्यादा वरीयता देता है।


43. LINKS FROM BAD SITES- जो वेबसाइटें, सर्च इंजनों की guidelines को तोड़ती है उनसे आने वाले बैकलिंको से आपकी वेबसाइट को नुकसान पहुंच सकता है।



44. GUEST POST LINKS-  कुछ साल पहले तक गेस्ट पोस्ट करने से मिलने वाले backlinks बहुत असरदार होते थे, लेकिन अब ऐसा नही है। अगर आप बहुत सारी वेबसाइटों पर गेस्ट पोस्ट करके बैकलिंक बनाते हैं तो गूगल उन लिंकों की ताकत को कम कर देता है।





45. LINKS FROM ADS- गूगल की policy कहती है कि ad में दिया गया link NOFOLLOW होना चाहिए। ऐसा न करने पर आपकी साइट ban की जा सकती है।


46. HOMEPAGE AUTH.- किसी वेबसाइट के main page को मिलने वाले बैकलिंक्स ज़्यादा ताकतवर होते हैं बजाय किसी post या page को मिलने वाले बैकलिंक के!


47. NO FOLLOW LINKS- वैसे गूगल no-follow links पर ज़्यादा ध्यान नही देता है लेकिन गौरतलब है कि वह कभी-कभी नो-फॉलो लिंक्स को भी तवज्जो दे देता।है। इसलिए वेबसाइट पे दोनों तरह के लिंक (Do Follow & No Follow) मौजूद होने चाहिए।


48. LINK SOURCES- अगर आपके backlinks अलग-अलग जगहों से आ रहे हैं (जैसे- कुछ forums से, कुछ profile से और कुछ comments से) तो यह शानदार बात है। अगर ऐसा नही है तो फिर यह चिंता का विषय है :(




49. OTHER WORDS AROUND LINK- गूगल किसी लिंक के अगल-बगल में मौजूद दूसरे शब्दों को भी देखता है। Sponsored, Guest/Paid Post, Link Partener जैसे शब्द लिखे होने से बैकलिंक का महत्व घट जाता है।


50. CONTEXUAL LINKS- किसी पेज के अंदर कंटेंट के साथ naturally दिया हुआ link ज़्यादा शक्तिशाली होता है।


51. INTERNAL LINKS ANCHOR TEXT- हमारी वेबसाइट के अंदर की दूसरी posts के links के एंकर टेक्स्ट से भी फर्क पड़ता है।


52. LINKS COUNTRY- CODE TLD SITES-  किसी खास country domain (जैसे- .in, .pk, .us) की वेबसाइट से आने वाले लिंक आपको उस देश में अच्छी position पर rank करने में मदद कर सकते हैं।








53. LINK LOCATION IN CONTENT- अगर कोई link पोस्ट की शुरुआत में दिया होता है तो वह ज्यादा असरदार होता है।


54. LINK LOCATION IN PAGE- पेज के content के बीच में दिया हुआ लिंके, footer या sidebar में दिए हुए link से ज्यादा powerful होता है।


55. LINKS FROM SAME NICHE SITE- अगर आपकी साइट का टॉपिक technology है और आपको किसी दूसरी technology टॉपिक वाली साइट से बैकलिंक मिलता है तो इस तरह का बैकलिंक ज्यादा प्रभावी होता है।


56. PAGE-RELEVANCY- अगर आपको किसी अच्छे कांटेक्ट वाले पेज से backlink मिलता है तो वह बैकलिंक ज्यादा मजबूत होता है।


57. KEYWORDS IN TITLE-  जिस पोस्ट का टाइटल आपकी पोस्ट के title से मैच करता है तो गूगल उससे मिलने वाले backlink को ज्यादा तवज्जो देता है।


58. POSITIVE LINK VELOCITY- जिस website को जितनी तेजी से ज्यादा अच्छे लिंक मिलते हैं उसकी Google Ranking उतनी ही तेजी से बढ़ती है।


59. NEGATIVE LINK VELOCITY-  ज्यादा गलत लिंक बनने से गूगल में हमारी वेबसाइट की rankings तेजी से गिर सकती हैं।


60. LINKS FROM "HUB PAGES"- जिन वेबसाइटों को किसी टॉपिक का HUB समझा जाता है (जैसे- git.com को developers का) तो उनसे मिलने वाले बैकलिंक्स को अधिक तवज्जो दी जाती है।


61. LINKS FROM HIGH-AUTH SITES-  एक छोटी साइट के मुकाबले किसी बड़ी साइट से मिलने वाले का backlink का गूगल की नजर में ज्यादा महत्व होता है।


62. LINKS FROM WIKIPEDIA- अगर विकीपीडिया से आपकी वेबसाइट को backlink मिलता है तो इससे गूगल की नजरों में आपकी साइट का trust बढ़ जाता है हालांकि विकिपीडिया से मिलने वाले सारे बैकलिंक्स no-follow होते हैं।




63. WORDS AROUND LINK- लिंक पर या उसके आसपास जो शब्द लिखे होते हैं उनसे गूगल पता लगाता है कि वह पोस्ट (जिसका लिंक दिया गया है) किस चीज के बारे में है।


64. BACKLINK AGE- पुराने backlinks, नए बने लिंक्स की तुलना में ज्यादा पावरफुल होते हैं।



77. "CTR" FOR A KEYWORD- अगर ज्यादातर लोग किसी keyword पर शो होने वाले रिजल्ट्स में से एक ही रिजल्ट पर click करते हैं तो गूगल उस पेज की rank बढ़ा देता है। इसको PogoSticking कहा जाता है।


78. BOUNCE RATE-  अगर लोग गूगल से आपकी वेबसाइट पर जाकर सिर्फ एक पोस्ट ही पढ़ते हैं और फिर वहां से वापस चले जाते हैं तो इससे आपकी रैंकिंग गिर सकती है। 



माना कि आपकी वेबसाइट पे अगर 100 लोग आते हैं और 60 लोग सिर्फ एक पोस्ट पढ़कर वापस चले जाते।हैं, बाकी के 40 लोग और पोस्ट भी पढ़ते हैं तो इस कंडीशन में आपकी वेबसाइट का बाउंस रेट 60% होगा।



79. DIRECT VISITS- अगर बहुत सारे लोग सीधे Chrome Browser में आपकी वेबसाइट का URL डालकर उस पर जाते हैं तो इससे आपकी वेबसाइट की Authority बढ़ती है और अथॉरिटी बढ़ने से रैंक अपने आप ही बढ़ जाती है।


80. RETURNING VISITORS-  अगर बहुत सारे लोग आपकी वेबसाइट पर बार-बार आते हैं तो गूगल की नजर में आपकी वेबसाइट की इज्जत बढ़ जाती है


81. POGOSTICKING BOUNCE- जब लोग गूगल से क्लिक करके आपकी वेबसाइट तक जाते हैं और थोड़ी देर बाद वापस आ जाते हैं और फिर दूसरी वेबसाइट पर चले जाते हैं, तो इसे "पोगोस्टिकिंग बाउंस" कहते हैं। इससे गूगल को लगता है कि आपकी वेबसाइट लोगों के सवाल का सही जवाब नहीं देती है और वह उसकी रैंकिंग्स को गिरा देता है।


82. BLOCK SITES- अगर बहुत सारे लोग आपकी वेबसाइट को गूगल के क्रोम ब्राउजर में block कर देते हैं तो इससे आपकी गूगल रैंकिंग पर खतरा हो जाता है। 




83. CHROME BOOKMARKS- गूगल क्रोम  ब्राउज़र में बहुत सारे लोगों कर द्वारा बुकमार्क की हुई वेबसाइट की रैंकिंग सुधरती है।


84. NUMBER OF COMMENTS- कमेंटों की संख्या में इजाफा होने पर गूगल में आपकी साइट की रैंकिंग बढ़ने की अच्छी संभावना होती है।


85. DWELL TIME- गूगल सर्च से आपकी साइट पर आने वाले लोग उस पर जितना ज्यादा वक़्त बिताते हैं उतना ही वह वेबसाइट गूगल की नजर में ऊपर चढ़ती है।









5)• ब्रांड सिग्नल (BRAND SIGNALS): 


» गूगल ब्रांडेड वेबसाइटों को लोगों को सबसे पहले दिखाना चाहता है और इन चीजों के आधार पर गूगल यह पता लगाता है कि कोई वेबसाइट branded है या नहीं।


86. BRANDED SEARCHES- अगर लोग आपके ब्रैंड या वेबसाइट का नाम गूगल में सर्च करके आपकी वेबसाइट पे जाते हैं तो गूगल का आपकी वेबसाइट पर भरोसा और मजबूत हो जाता है।


87. BRAND NAME ANCHOR TEXT- अगर आपकी वेबसाइट के backlink पे आपकी साइट का नाम लिखा है तो इससे बैकलिंक का प्रभाव बढ़ जाता है।


88. BRAND NAME + KEYWORD SEARCHES- अगर कई सारे लोग अपने सवालों को आपकी वेबसाइट के नाम के साथ लिखकर सर्च करते हैं तो इससे आपकी रैंकिंग पर सीधा सीधा असर पड़ता है।
[जैसे- Digital Marketing Guide Neil Patel]


89. FACEBOOK PAGE- गूगल बहुत कम ही सही मगर आपकी साइट के facebook page, उसके likes और engagement को भी चेक करता है।


90. TWITTER PROFILE- अच्छे followers count वाली Twitter id आपकी साइट के ब्रांड होने का संकेत गूगल को देती है।


91. LINKEDIN PAGE- आपका लिंक्डइन पेज भी आपकी वेबसाइट की रैंकिंग्स पर प्रभाव डाल सकता है।


92. KNOWN AUTHORS- बड़े और जाने-माने लेखकों के द्वारा लिखी गयी पोस्टों को गूगल ज़्यादा वरीयता देता है।




93. SOCIAL MEDIA ENGAGEMENTS- अगर आपकी वेबसाइट के सोशल मीडिया एकाउंट पे लोग बहुत ज़्यादा लाइक, कमेंट, शेयर करते हैं, तो आपको अच्छी रैंकिंग मिलने के आसार ज़रा-सा बढ़ जाते हैं।


94. BRAND MENTIONS ON TOP STORIES- गूगल के टॉप स्टोरीज फीचर में जो ब्रांड दिखाई देते हैं, उनपे गूगल ज़्यादा भरोसा करता है।




95. NOT-LINKED BRAND MENTIONS- अगर कोई व्यक्ति अपनी वेबसाइट में आपकी वेबसाइट के सिर्फ नाम का ही ज़िक्र करता है backlink नहीं देता है, तो गूगल आपकी वेबसाइट के नाम तक को भी notice करता है।




96. REAL OFFICE LOCATION- अगर आपकी कम्पनी या वेबसाइट का कोई आफिस भी है तो गूगल उसकी location को भी जानने की कोशिश करता है।



6)• गूगल के नए एल्गोरिथ्मों के फीचर (SPECIAL GOOGLE ALGO FEATURES)- 



गूगल ने पिछले कुछ सालों में अपने रैंकिंग के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं जिसमे उसने इन नए फीचर्स को roll out किया है-


97. POST SHOULD BE FRESH- गूगल हाल-फिलहाल में ही लिखी या फिर अपडेट की हुई पोस्टों को अपने सर्च में ज़्यादा भाव देता है।


98. DIVERSITY IN RESULTS- अगर एक ही चीज़ के बहुत सारे मतलब होते हैं तो गूगल एक ही चीज़ के बारे में बताने के बजाय थोड़ा-थोड़ा सबके बारे में बताता है। जैसे- "Shiva" सर्च करने पर गूगल भगवान शिव और शिवा मूवी दोनों के बारे में रिजल्ट दिखाता है।


99. USER BROWSING HISTORY- जिन वेबसाइटों को आप कई बार visit करते हैं वो आपको गूगल में ऊपर दिखती हैं।








100. USER SEARCH HISTORY- आपने पहले क्या-क्या सर्च कर रखा है इससे भी आपके रिजल्ट प्रभावित होते हैं। जैसे- अगर सबसे पहले आप "Delhi" सर्च करते हैं और फिर उसे मिटाकर "Flat" सर्च करते हैं तो गूगल आपको फ़्लैट के जो रिजल्ट्स दिखायेगा वो ज़्यादातर दिल्ली में मौजूद फ्लैट्स के बारे में होंगे।


101. FEATURED SNIPPETS- गूगल किसी वेबसाइट को फीचर्ड स्निपेट (Zero Position) में दिखाने के लिए उसकी page auth, https और content length के साथ-ही-साथ पोस्ट किस ढंग से लिखी गयी है, यह भी देखता है।




102. SAFE SEARCH- अगर आपकी वेबसाइट में कुछ adult content है तो safe search feature इस्तेमाल करने वाले लोगों को आपकी पोस्ट नहीं दिखेगी।


103. YOUR MONEY OR YOUR LIFE KEYWORDS- जो कीवर्ड जिंदगी और पैसे से संबंधित होते हैं उन पर rank करने के लिए आपके Content की quality बेहद शानदार होनी चाहिए।


104. © COMPLAINTS (DMCA)- अगर कोई आपकी वेबसाइट पर copyright complaint कर देता है तो इससे आपकी रैंकिंग गिर सकती है।


105. DOMAIN DIVERSITY- 2012 में गूगल के Bigfoot Update के बाद में SERPs में कई सारे अलग-अलग डोमेनों से रिजल्ट आने शुरू हुए एक ही वेबसाइट के कई पेज एक ही कीवर्ड पर रैंक होना कम हुए।


106. TRANSACTION RELATED KEYWORDS- जो सर्च लेन-देन से जुड़े होते हैं कभी- कभी गूगल उनके बारे में ज्यादा जानकारी (aditional info) शो करता है। जैसे- flights





107. LOCAL SEARCHES- अपने आसपास की जानकारी पाने के लिए किए गए सर्च में गूगल Organic Listings से पहले Local Results को दिखाता है। जैसे- Restaurant, Hotel 


108. TOP STORIES BOX- कुछ बड़ी वेबसाइटों का जो Fresh Trending Content होता है, वह गूगल सर्च में टॉप स्टोरीज में दिखता है।


109. BIG BRANDS RANK BOOST- साल 2009 के Vince Update के बाद गूगल ने ब्रांड वेबसाइटों को अपने सर्च में ज्यादा वरीयता देना शुरू किया।


110. SHOPPING RESULTS-  अगर गूगल को लगता है कि लोग कुछ खरीदने के लिए सर्च कर रहें है तो वह उन्हें Organic Results से पहले कुछ Shoppong से related चीजें दिखाता है।




111. IMAGE RESULTS-  अगर गूगल को लगता है कि लोग फोटो के लिए सर्च कर रहे हैं तो गूगल उन्हें ऑर्गेनिक रिजल्ट से पहले photos को दिखाता है।


112. SINGLE SITE RESULTS- अगर आप किसी brand का नाम गूगल में सर्च करते हैं और सारे रिजल्ट एक ही वेबसाइट से आते हैं तो गूगल उस वेबसाइट की रैंकिंग को बढ़ाता है।


113. PAY-DAY LOAN UPDATES-  साल 2014 में आए इस अपडेट का मकसद गूगल में सर्च की जाने वाली घटिया चीजों को कम करना है।










7)• ऑफ-पेज फैक्टर्स (OFF-PAGE RANKING FACTORS)- 




114. HACKED WEBSITES- अगर गूगल को कभी ऐसा लगता है कि कोई वेबसाइट हैक हो गई है तो वह उसको अपने सर्च में दिखाना पूरी तरह से बंद कर देता है ताकि लोगों को उससे कोई नुकसान ना हो।


115. RAPID UNNATURAL LINKS- अगर किसी साईट के links बहुत तेजी से बनते हैं तो यह spammy links की तरफ इशारा करता है।


116. PENGUIN PENALTY-  साल 2012 में आए गूगल के पेंग्विन अपडेट से जिन साइटों को नुकसान पहुंचा था, वो आज भी गूगल में कम ही नजर आती है। बता दें कि पेंगुइन अपडेट के आने से Black Hat SEO करने वाली साइटों को सजा मिली थी।


118. UNRELEVANT LINKS- अपनी niche (topic) से बाहर के निच वाली साइटों से ज्यादा होने से आपकी साइट को खतरा हो सकता है।


119. UNNATURAL LINK WARNING- गूगल गलत तरह से लिंक बनाने पर Search Console के माध्यम से लोगों को warning भेजता है। इन चेतावनियों पर ध्यान न देने से गूगल में आपकी रैंकिंग को नुकसान पहुंच सकता है।


120. LOW QUALITY DIRECTORY LINKS-  घटिया ब्लॉग डाइरेक्टरी से बहुत सारे लिंक बनाने पर आप की वेबसाइट पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।








121. WIDGET LINKS-  जब हम किसी theme, tool, widget या gadget को बनाकर उसमें अपनी वेबसाइट का link दे देते हैं, तो उसमें जो लिंक होता है उसे गूगल में backlinks में नहीं गिनता है।


122. LINKS FROM SAME IP- गूगल हमारी डिवाइस का IP Address भी track करता है और अगर एक ही IP से चलने वाले दो या अधिक ब्लॉगों से आपकी साइट को बैकलिंक मिलते हैं तो उनकी वैल्यू अपनेआप ही घट जाती है।


123. PRESS RELEASE & ARTICLE LINKS-  गूगल प्रेस रिलीज और अर्टिकल डाइरेक्टरी के links को अब ज़्यादा महत्व नहीं देता है।


124. MANUAL ACTIONS- अगर कोई व्यक्ति या गूगल का ही कोई आदमी आपकी वेबसाइट की गूगल से complaint करता है तो इसे Manual Action कहा जाता है। इससे आपकी वेबसाइट पर काफी बुरा असर पड़ता है।


125. SELLING LINKS- लिंक बेचने या खरीदने का अगर गूगल को पता चलता है तो आपकी वेबसाइट बैन हो सकती है।


126. GOOGLE SANDBOX EFFECT- जब नई वेबसाइटों को उम्मीद से ज्यादा तेजी से backlinks मिलते हैं तो गूगल उन्हें शक के घेरे में खड़ा करता है और उन्हें सर्च में कम दिखाता है। इसे 'सैंडबॉक्स इफ़ेक्ट' कहते हैं।


127. GOOGLE DANCE- जब गूगल अपने रैंकिंग के नियमों (Algorthm) में बदलाव करता है तो कुछ वक्त के लिए बहुत सारी वेबसाइटों की रैंकिंग में गड़बड़ी आ।जाती हैं, इसे 'गूगल डांस' कहा जाता है।


128. DISAVOW TOOL- अगर आपकी साइट पर negative SEO का यूज करने की वजह से कोई penalty लग रखी है तो आप उसे 'डिसावऊ टूल्स' की मदद से हटा सकते हैं।


129. RECONSIDERATION REQUEST- अगर आपकी साइट पे गूगल की कोई पेनल्टी लगी हुई है तो आप गूगल को एक अच्छी-सी पुनर्विचार याचिका लिखके उसे हटा सकते हैं।


130. TEMPORARY LINK SCHEMES- कई लोग थोड़े समय के लिए थोड़े-समय के लिए spammy links बनाते हैं और फिर उन्हें हटा देते हैं। गूगल अपनी 20 साल की यात्रा में ऐसी कई वेबसाइटों को बैन कर चुका है।



8)• वेबसाइट से जुड़े तकनीकी रैंकिंग फैक्टर्स (Technical Ranking Factors):









131. PAGE SPEED- गूगल तेजी से खुलने वाली वेबसाइटों को अपने सर्च में ज़्यादा प्राथमिकता देता है। इसलिए अच्छी गूगल रैंकिंग पाने के लिए हमें अपनी साइट में हल्की कोडिंग और कम टूल्स का इस्तेमाल करना चाहिए।




132. USE OF AMP (ACCELERATED MOBILE PAGES)- जो वेबसाइटे AMP का इस्तेमाल करती है (ए.एम.पी से मोबाइल में website तेजी से खुलती हैं) उन्हें गूगल अच्छी रैंकिंग देने में नही हिचकिचाता। जैसे- News Websites




133. HEAVY CODING- बहुत ज़्यादा javascript और bootstrap coding का उपयोग करने से वेबसाइट भारी हो जाती है, जिससे उसकी खुलने की रफ्तार घट जाती है और इससे रैंकिंग बुरी तरह से प्रभावित होती है।


134. SITE ARCHITECTURE- जो वेबसाइट अच्छे तरीके व्यवस्थित की होती है वह आसानी से गूगल में रैंक हो जाती है।


135. SITE DOWNTIME- अगर किसी वेबसाइट का server बहुत ज़्यादा बार down रहता है तो इससे उसकी रैंकिंग पर।बुरा असर पड़ता है।


136. SERVER LOCATION- वेबसाइट का सर्वर किस जगह या देश में है, इससे भी रैंकिंग पर फर्क पड़ता है। सर्वर नजदीक होना अच्छा।रहता है।


137. SSL CERTIFICATE- ब्लॉगर प्लेटफार्म पे बनी वेबसाइटों के लिए SSL certificate जरूरी नही होता है लेकिन वर्डप्रेस साइटों के लिए होता है। इससे साइट secure रहती है और उसके url में https लिखा आ जाता है।


138. COMPATIBLE W/ ALL DEVICES- जो वेबसाइट हर डिवाइस (phone, tablet, computer) पर अच्छे तरीके से fit हो जाती है, गूगल को वो अच्छी लगती है।


139. SITE USABILITY- जो वेबसाइट अच्छे ढंग से व्यवस्थित नहीं होती है अक्सर लोग उसे पसन्द नहीं करते हैं। और याद रखिये जिस साइट को लोग पसन्द नहीं करते, उसे गूगल भी पसन्द नहीं करता है।


140. REMOVE BUGS- जिन वेबसाइटों में बग या virus मौजूद होने की संभावना होती हैं, गूगल उन्हें डी-इंडेक्स कर देता है।


141. IP ADDRESS SPAMMING- अगर आपके कम्प्यूटर के IP address को ही गूगल spam करार देता है, तो इससे उस कंप्यूटर से संचालित आपकी सारी वेबसाइटों पर बुरा असर पड़ता है।


142. SITEMAP- अपनी वेबसाइट का साइटमैप सर्च इंजनों जैसे-गूगल, बिंग, याहू मे जमा कराने से रैंकिंग में उछाल आता है।




143. ROBOT. TXT- अपने ब्लॉग पर robo.txt डालने से सर्च इंजन ये जान पाते हैं कि वेबसाइट के कौन-कौन से पेजेस या पोस्ट को रैंक करना है और कौन-कौन से को नहीं।


144. CRAWL RATE- क्रॉल बजट किसी वेबसाइट के पेजों की वह संख्या होती है जिनकी जानकारी गूगल के पास मजजूद होती है यानी जिन्हें गूगल crawl कर चुका होता है।


145. REDIRECTS- हमें अपनी साइट पर बहुत ज्यादा रिडिरेक्ट्स नहीं लगाने चाहिए। इससे साइट का seo खराब होता है।


146. 404-ERRORS-  बहुत सारे broken links (जिनका यूआरएल बदल दिया गया होता है) होने से साइट के Seo पर बुरा असर पड़ता है।








147. URL STRUCTURE- यू.आर.एल छोटे और कीवर्ड वाले होने चाहिए। 


148. SCHEMA MARKUP- साइट का स्कीमा मार्कअप  करने से गूगल लोगों को आपकी वेबसाइट को अच्छे ढंग से दिखा पाता है।


149. AD BALANCE-  हमें अपनी वेबसाइट पर बहुत ज्यादा ऐड नहीं लगानी चाहिए। इससे वेबसाइट पर बुरा असर पड़ता है।


150. WEB HOSTING-  हमें अपनी वेबसाइट के लिए अच्छी Web Hosting लेनी चाहिए। इससे SEO पे अच्छा प्रभाव पड़ता है।


151. GEOGRAPHICAL LOCATION- गूगल अलग-अलग जगह के हिसाब से अलग-अलग रिजल्ट दिखाता है। जैसे- अगर अमेरिका में कोई व्यक्ति Independence Day सर्च करता है तो गूगल 4 July दिखाता है और अगर यही चीज कोई व्यक्ति भारत में सर्च करता है तो गूगल इस सवाल का जवाब 15 August दिखाता है। ऐसा जगहों में फर्क के कारण होता है।


152. PERSONAL RESULTS- अलग-अलग लोगों को अलग-अलग चीजें पसंद होती है और गूगल ये बात जानता है कि किसी आदमी को क्या पसंद है ! इसलिए कई बार वह लोगों को उनकी पसंद के हिसाब से अलग-अलग रिजल्ट दिखाता है। ऐसा वह इसलिए कर पाता है क्योंकि उसके पास गूगल चलाने वाले हर आदमी की पसन्द/नापसन्द की जानकारी होती है।




🕵️  CURIOUSITY CORNER:


Q.1- गूगल किसी सवाल का जवाब देने के लिए कितने तरह के रैंकिंग फ़ैक्टरों का इस्तेमाल करता है?

» माना जाता है कि गूगल लोगों के किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए अलग-अलग वेबसाइटों को करीब 200 चीजों (factors) के आधार पर जांचता- परखता है और फिर जो उसे उनमें से best results मिलते हैं उन्हें वह लोगों को सबसे पहले दिखाता है।









Q.2- अच्छी रैंकिंग पाने के लिए क्या गूगल के सभी 200 फ़ैक्टरों का पालन करना जरूरी है?

» सीधा-सा जवाब है- नहीं! हम चाहकर भी अपनी वेबसाइट के इतने सारे पहलुओं पर एक साथ ध्यान नहीं दे सकते हैं। इसलिए बेहतर यही होगा कि हम केवल कुछ main-main चीजों पे ध्यान दे। कुछ important ranking factors ये हैं-


• High Quality Posts
• Keyword Research
• Natural Backlinks
• Good User Experience 
• Technical SEO



ℹ️  AUTHORS' ANGLE: 


गूगल अपने यूज़र्स को सबसे अच्छी वेबसाइटों को सबसे पहले दिखाना चाहता है इसीलिए तो वह हर वेबसाइट की गहराई में जाके अच्छे से जांच-पड़ताल करता है।


अगर गूगल की तरह ही हम भी अपने लोगों को अच्छी जानकारी देने का प्रयास करेंगे तो यकीन मानिए गूगल जरूर हमें लोगों को सबसे पहले दिखायेगा।


उम्मीद करते हैं कि आपको गूगल के टॉप रैंकिंग फ़ैक्टरों की सूची/ Google Top Ranking Factor ki list hindi me जरूर पसंद आई होगी। कोई सवाल-सुझाव हो, तो बेझिजक कमेंट के माध्यम से बताएं और इस आर्टिकल को उन लोगों के साथ share जरूर करें, जिन्हें Blogging, SEO या Digital Marketing पसंद है।


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