7 वजहें– जिनके कारण बन्द हुई सोशल नेटवर्किंग साइट गूगल प्लस (+)

यह जरूरी नहीं है कि अगर कोई बड़ी और सफल कंपनी अपनी कोई Service लॉन्च करें तो वह पूरी तरह सफल हुई हो और इसी बात की पुष्टि करती है Google की अप्रैल 2019 में बंद हुई सोशल मीडिया सर्विस- गूगल प्लस (GOOGLE+)




गूगल के द्वारा Social Media Giant फेसबुक को टक्कर देने के लिए बनाए गए इस प्लेटफार्म के बारे में अगर आप ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं, तो यकीन मानिए, इसमें आपकी कोई गलती नहीं है क्योंकि गूगल की यह Service थी ही इतनी कम लोकप्रिय, कि कई लोग आज तक इसके बंद होने के बाद भी इसके बारे में नहीं जान पाए हैं!








अपने पुराने सोशल वेब प्लेटफॉर्म्स औरकट और जी-टॉक (Orcut & G-Talk) की जगह भरने के लिए गूगल द्वारा 30 मई 2011 को जारी किया गया गूगल प्लस अपने लॉन्च के सिर्फ 8 सालों के भीतर ही बंद हो गया और इसके बंद होने का कोई एक विशेष कारण नहीं है बल्कि इसके कई सारे कारण हैं जिनके बारे में हम आज की इस आर्टिकल में बात करने वाले हैं।


» पेश है ऐसी ही 7 बड़ी वजहें, जिनके कारण गूगल प्लस (G+) को बंद होना पड़ा-



• GOOGLE+ QUICK FACTS:


• लॉन्चिंग (Launching): 30 May 2011

• निर्माणकर्ता (Developers): Vic Gundotra &  Bradley Horowitz

• मालिक कम्पनी (Parent Co.): GOOGLE

• कुल उपयोगकर्ता (Total Users): 2.2 Billion

• बन्द (Shut Down): 2 April 2019






• गूगल प्लस (+) के बन्द होने के 7 बड़े काऱण/ 7 Reasons Why Google Plus Got Failed & Shut Down in Hindi









1)• चीजो को कठिन रखना (Making Things Pretty Complex):


गूगल प्लस ज्यादातर लोगों को प्रभावित नहीं कर पाया और इसके सबसे बड़े कारणों में से एक कारण था- इसका जटिल डिज़ाइन (Complex Interface)


› नीचे दिए हुए Screenshot में आप आसानी से देख सकते हैं कि गूगल+ का इंटरफ़ेस कितना Confusing है...




इसके अलावा गूगल प्लस के जो फीचर्स थे वे भी काफी Complex थे, जिसके कारण एक Normal व्यक्ति उनका इस्तेमाल उतनी आसानी से नहीं कर पाता था, जितनी आसानी से वह फेसबुक के फीचर्स को use कर पाता है।


उदाहरण के लिए- गूगल प्लस का CIRCLE फीचर इतना ज़्यादा confusing था, कि कई लोगों ने इसके कारण गूगल प्लस चलाना ही छोड़ दिया।

इसलिए एक Service Provider के रूप में हमें चीजों को आसान बनाना आना चाहिए वरना हमारा कोई वास्तविक मूल्य नहीं रह जाता।



2)• ज़्यादा प्रोफेशनलिस्म (Over Professionalism):


अति चाहे किसी भी चीज की हो, होती बड़ी घातक है। और दुर्भाग्य से ऐसा ही गूगल प्लस के साथ भी हुआ।


गूगल प्लस के डेवलपर्स ने इसके Icons, Interface और Design से लेकर Algorithm लगभग हर चीज़ को बहुत प्रोफेशनल बनाने की कोशिश की, जो कि ज्यादातर non-professional लोगों को रास नहीं आया।


उदाहरण के लिए- गूगल+ ने LIKE की जगह प्लस वन (+1) का use किया, जिसे इस्तेमाल करते वक्त लोगों को उतनी अच्छी feelings नहीं आ पाती हैं जैसी फेसबुक पे REACT (LIKE, LOVE, HAHA, ANGRY, SAD) करने में आती है।


इसलिए हमें किसी भी चीज को अपनी Audience के हिसाब से बनाना चाहिए, जिससे उन्हें ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके।







3)• ज़्यादा यूनिक करने की कोशिश (Tryna Over Stand Out):


गूगल में गूगल प्लस को उस समय मौजूद हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटकर बनाने की हरसम्भव कोशिश की, जिसके कारण जाने-अनजाने में उसने चीजों के नाम काफी जटिल कर दिए।


उदाहरण के लिए- उसने गूगल प्लस में Groups का नाम Communities रखा; Like का नाम प्लसवन (+1) रखा आदि.

कई बार, बहुत ज्यादा हटके करना Dangerous हो सकता है इसलिए हमें Unique करने की कोशिश उतनी ही करनी चाहिए जितनी जरूरी हो।



» Read Rec: सोचिये और फिर करिये, दुनिया से ज़रा हटके






4)• सिर्फ प्रचार ही सबकुछ नहीं होता (PROMOTION is not Everything):


2011 में जब गूगल प्लस Market में आया था, तो तब GOOGLE INC दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन कॉर्पोरेशन बन चुकी थी। इसलिए गूगल प्लस के लॉन्च होते ही गूगल ने इसका धुआंधार प्रचार करना शुरू कर दिया।


उसने गूगल प्लस को उस समय नए नए निकले Android Smartphones में पहले से ही डाउनलोड (Pre installed) करके दिया, जिससे करीब 2 अरब लोगों ने उस पर अपनी ID तो बना ली मगर उसके Boring features के कारण उनमें से अधिकांश लोग उस पर ज्यादा दिन नहीं टिक पाए।


इसलिए किसी भी चीज का प्रचार ही सब कुछ नहीं होता, लोगों के User Experience को बेहतर बनाना भी बेहद जरूरी होता है। एकदम वैसे ही जैसे व्हाट्सएप ने खुद को सफल बनाने के लिए किया।



» Read Rec:  9 बातें– जो हर Entreprenuer व्हाट्सएप कम्पनी की सफलता से सीख सकता है




5)• लोगों की जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पाना (Not Updating enough frequently):


जहां एक ओर फेसबुक और व्हाट्सएप करीब हर महीने अपने Apps का कोई ना कोई Update निकालते रहते हैं, वहीं दूसरी ओर गूगल प्लस साल में कभी एक बार अपने फीचर्स को Update करता था


इसके कारण गूगल प्लस चलाने वाले लोग इसके उन्हीं पुराने features से ऊब जाते थे, और संभवत इसी कारण उन्होंने इसका इस्तेमाल करना भी काफी कम कर दिया।



6)• देरी से लॉन्च होना (Being Late):


फेसबुक 2004 में आया और इसके ही 2 साल बाद आ गया था ट्विटर। लेकिन गूगल प्लस को आने में 7 साल का लंबा वक्त लग गया।


जिस समय गूगल प्लस शुरू हुआ, तब तक एक ओर आम लोगों के Social Media Space में मार्क एंड कंपनी अपना एकछत्र राज स्थापित कर चुकी थी, वहीं दूसरी तरफ Celebrity Social Media Space में जैक डोर्सी की कंपनी टि्वटर लगातार अपना वर्चस्व बढ़ा रही थी।


इस Situation में गूगल प्लस के लिए मार्केट में जगह बना पाना बहुत ही ज्यादा Tough था, क्योंकि फेसबुक और ट्विटर जैसे उसके प्रतिद्वंद्वियों को पहले से ही एक Head Start मिल चुका था। इसलिए देरी से शुरू करना भी गूगल प्लस के असफल होने का एक बड़ा कारण रहा है।









7)• सुरक्षा घेरा मजबूत न कर पाना (Being Vulnerable):


अक्टूबर 2018 में 5 लाख भारतीय गूगल प्लस अकाउंट का डाटा चोरी हुआ। इसके ही करीब 2 महीने बाद यानी दिसंबर 2018 में दुनियाभर के  5.5 करोड़ जी+ अकाउंट के डाटा पर हैकर्स ने सेंध लगाई।



जिस वक्त ये Cyber Attack हुए उस समय गूगल प्लस को लोग बहुत कम इस्तेमाल कर रहे थे जिसके कारण संभवत Googlers इसकी सुरक्षा के प्रति थोड़े-से लापरवाह हो गए थे और इस तरह यह सोशल मीडिया साइट हैकरों के लिए एक खुली तिजोरी बन गई।



इस तरह डाटा चोरी होने से गूगल को Google Plus को बंद करने का एक ठोस बहाना मिल गया और आखिरकार उसने 2 अप्रैल 2019 को गूगल+ को लोगों के Personal Use के लिए बंद कर दिया (हालांकि यह G Suite Business Accounts के लिए यह अभी भी काम करता रहेगा).




📸 गूगल प्लस बन्द के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए आप यह वीडियो देख सकते हैं-



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ℹ️  AUTHORS' ANGLE: 

असफलता चाहे हमारी खुद की हो या फिर किसी दूसरे जी मगर हमें सिखाती कुछ-कुछ जरूर है। जरा सोचिये, ऐसे ही और कौन-कौन से सबक हम गूगल+ की असफलता से सीख सकते और कैसे हम उन्हें अपनी जिंदगी में implement कर सकते हैं।


तो ये थे गूगल प्लस के जल्दी बंद हो जाने के कुछ मुख्य कारण/ Main Reasons Why Google Plus Shut Down Just Within 8 Years




तो दोस्तों, यही था आज था Article. उम्मीद करता हूँ आपको ये पसन्द आया होगा।



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2 Comments

  1. So can you tell us what could have been done by Google+ to make there program successful.

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    1. Thanks for your question. Actually, I'm not able to provide any advice to Google in any case, as it's a giant organisation, there are several thousands of people to take care of their development procedure.

      Ultimately what we can do is merely observe them, learn from their mistakes and not commit these mistakes in our own lives.

      I am not able to write on this topic, as it is not cuppa of tea. You can head over to Google and search for the same, there are a good many experts of this field, who take care of this matter.

      Thanks for reading. Keep reading.

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